20 मई 2026 सरकारी अस्पतालों में कथित मेडिकल नेग्लिजेंस का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 31 वर्षीय युवक रमन कुमार ने आरोप लगाया है कि समय पर सही इलाज न मिलने के कारण उसकी बायीं आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। पीड़ित परिवार ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डॉक्टरों और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गांव अजौली निवासी रमन कुमार ने बताया कि 6 अप्रैल 2024 की रात सैर के दौरान मोटरसाइकिल सवार युवकों के साथ मामूली कहासुनी हो गई थी। आरोप है कि इसके बाद 15 से 20 लोगों ने उस पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में उसकी बायीं आंख गंभीर रूप से घायल हो गई, कलाई टूट गई और शरीर पर कई चोटें आईं।
रमन के अनुसार, पहले उसे सिविल अस्पताल ऊना ले जाया गया, फिर सिविल अस्पताल नंगल और बाद में जिला अस्पताल रूपनगर रेफर किया गया। परिवार का आरोप है कि अस्पतालों में समय रहते उचित इलाज नहीं मिला और रूपनगर की आई स्पेशलिस्ट डॉ. गीरा रानिंगा ने बिना पर्याप्त जांच के उसे वापस भेज दिया, जिससे उसकी आंख की रोशनी चली गई।पीड़ित परिवार ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जिस महिला डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है, उसके पति डॉ. युवराज सिंह हीरा कथित तौर पर जांच समिति की बैठकों में शामिल होकर मामले को प्रभावित कर रहे हैं। परिवार ने इसे निष्पक्ष जांच के खिलाफ बताया है।इसके अलावा रमन कुमार ने पुलिस पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने उसके बयान तोड़-मरोड़कर दर्ज किए और हमले में इस्तेमाल हथियारों का सही विवरण एफआईआर में शामिल नहीं किया गया।परिवार ने बताया कि उन्होंने डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज, पंजाब मेडिकल काउंसिल, पंजाब मानवाधिकार आयोग, डीजीपी पंजाब और पंजाब सरकार के मुख्य सचिव तक शिकायतें भेजी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सरकारी अस्पतालों पर गंभीर आरोप इलाज में लापरवाही से युवक की आंख की रोशनी गई, जांच पर भी उठे सवाल
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