लोकसभा स्पीकर ओम बिरला एक बार फिर चर्चा में हैं। संसद के बजट सत्र के दौरान उनकी सख्त टिप्पणियों और महिलाओं की भागीदारी पर दिए गए बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर भी उन्हें खूब सर्च किया जा रहा है।
बजट सत्र के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। इसी हंगामे के बीच ओम बिरला ने अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे कोई काले झंडे दिखाए या पीले, इससे सदन की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।
डीएमके सांसद के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ओम बिरला ने साफ शब्दों में कहा कि सदन में विरोध जताने के अपने तरीके हो सकते हैं, लेकिन मर्यादा का पालन जरूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संसद में स्वस्थ बहस ही लोकतंत्र की असली ताकत है।
इस बीच, ओम बिरला ने महिलाओं की भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विजन की झलक है। स्पीकर ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में संसद में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।
संसद की कार्रवाई लगातार बढ़ते हंगामे के कारण कल तक स्थगित करनी पड़ी। ओम बिरला ने सभी सदस्यों से अपील की कि वे नियमों का पालन करें और बहस को रचनात्मक दिशा में ले जाएं।
ओम बिरला की यह सख्ती और महिलाओं को लेकर सकारात्मक सोच आम जनता के बीच काफी सराही जा रही है। उनके ताजा बयानों से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और अधिक व्यवस्थित होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओम बिरला का यह रुख न केवल संसदीय परंपराओं को मजबूत करता है, बल्कि महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। संसद में अनुशासन और भागीदारी के इस नए संदेश को देश भर में सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
