नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 लंबी अवधि के तकनीकी सुधार के दौर में बना हुआ है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार तक सूचकांक का अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज (200-DMA) से नीचे रहना 160 दिनों तक पहुंच गया। रिपोर्ट में इसे जनवरी 2012 के बाद समय के लिहाज से सबसे लंबे सुधारों में से एक बताया गया है, हालांकि गिरावट की गहराई ऐतिहासिक रूप से अपेक्षाकृत सीमित रही है।
200-दिवसीय मूविंग एवरेज क्या बताता है?
200-DMA पिछले 200 कारोबारी दिनों के औसत स्तर को दर्शाता है और बाजार विश्लेषक इसे दीर्घकालिक रुझान समझने के लिए देखते हैं। जब सूचकांक लंबे समय तक इस औसत से नीचे रहता है, तो इसे बाजार की कमजोर गति का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, केवल इस संकेतक के आधार पर भविष्य की दिशा निश्चित नहीं की जा सकती।
निवेशकों के लिए इसका क्या अर्थ है?
लंबे तकनीकी सुधार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव और सेक्टरों के प्रदर्शन में अंतर देखने को मिल सकता है। निवेशकों को कंपनी के नतीजों, मूल्यांकन, वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह जैसे कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए। अल्पकालिक तकनीकी संकेत किसी निवेश के लिए अपने आप में खरीद या बिक्री की सलाह नहीं हैं।
यह खबर बिजनेस स्टैंडर्ड की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट पर आधारित है। सूचकांक का स्तर और तकनीकी स्थिति कारोबार के साथ बदल सकते हैं।
स्रोत
Business Standard: Nifty logs third-longest technical correction।
