भारत में जनगणना प्रक्रिया एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। अब नागरिक खुद अपनी जनसंख्या संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को 'सेल्फ एन्युमरेशन' कहा जा रहा है, जिससे डेटा संग्रहण में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ेगी।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री पटेल ने हाल ही में सेल्फ एन्युमरेशन प्रक्रिया में हिस्सा लेकर इसकी शुरुआत की। उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी भरकर जनता को भी इसमें भाग लेने की प्रेरणा दी। इससे पहले तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करते थे, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप के जरिए लोग स्वयं अपने परिवार का डेटा दर्ज कर सकते हैं।
जनगणना विभाग के अनुसार, 2027 की जनगणना में इस नई पद्धति को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। कई जिलों में उपायुक्तों ने भी ऑनलाइन स्व गणना की शुरुआत कर लोगों को जागरूक किया है। डिजिटल जनगणना के चलते सरकार को न केवल त्वरित आंकड़े मिलेंगे, बल्कि नागरिकों की निजी जानकारी भी सुरक्षित रहेगी।
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग ने बताया कि सेल्फ एन्युमरेशन के लिए विशेष मोबाइल एप और वेबसाइट तैयार की गई है। नागरिकों को आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी दस्तावेजों की मदद से पंजीकरण करना होगा। एक बार जानकारी भरने के बाद, नागरिक उसे कभी भी संशोधित कर सकते हैं।
डिजिटल जनगणना की इस प्रक्रिया से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जनगणना में होने वाली त्रुटियां भी कम होंगी। सरकार की योजना है कि भविष्य में अधिक से अधिक लोग इस डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करें।
जनता में इस नए बदलाव को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई लोगों ने माना कि इससे समय की बचत होगी और जानकारी साझा करना आसान रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि सेल्फ एन्युमरेशन से भारत की जनसंख्या का अधिक सटीक और वास्तविक चित्रण सामने आएगा।
इस प्रकार, डिजिटल जनगणना और सेल्फ एन्युमरेशन की प्रक्रिया देश को डेटा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
