कनाडा की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मार्क कार्नी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ पार्टी ने संसद में बहुमत हासिल कर लिया है, जिससे अब सरकार को विपक्ष के समर्थन की आवश्यकता नहीं रहेगी। इस नई ताकत के साथ, सरकार ने तुरंत ही जनता के हित में कई अहम फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।
अब कार्नी की पार्टी के पास संसद में कुल 174 सीटें हो गई हैं, जिससे उनकी सरकार पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। इस बहुमत के चलते कानून पारित करने की प्रक्रिया भी सुगम हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे कनाडा में नीतिगत फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
सरकार ने बहुमत के तुरंत बाद जनता को 120 से ज्यादा दिनों तक राहत देने वाले आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत कई सामाजिक योजनाओं और रियायतों का विस्तार किया गया है। आम नागरिकों के लिए यह राहत ऐसे समय आई है जब महंगाई और आर्थिक चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।
इसी बीच, कनाडा में वर्क वीजा के नाम पर धोखाधड़ी के मामलों में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 4 लाख लोग फर्जी रिटेल स्टोर जॉब ऑफर लेटर के जाल में फंस चुके हैं। इन लोगों से वीजा और नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठी गई, जबकि असल में ऐसी नौकरियां थीं ही नहीं।
प्रवासी भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों को कनाडा में नौकरी का सपना दिखाकर ठगी की इन घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कनाडा सरकार ने इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए जांच तेज करने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और केवल अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही वर्क वीजा प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।
राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक राहत के बीच, कनाडा में वीजा घोटालों की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को न केवल आर्थिक मोर्चे पर, बल्कि प्रवासियों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए भी कड़े कदम उठाने होंगे।
कुल मिलाकर, कनाडा में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम ने जहां जनता को नई उम्मीद दी है, वहीं वर्क वीजा घोटालों ने सतर्कता की जरूरत भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
