भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि स्मार्टफोन में आधार ऐप रखना अनिवार्य नहीं है। इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकों में फैली अफवाहों पर विराम लग गया है। सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोरों पर थी कि सरकार हर स्मार्टफोन में आधार ऐप अनिवार्य करने जा रही है।
दरअसल, बीते दिनों कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार और कुछ स्मार्टफोन कंपनियां, जैसे सैमसंग, मिलकर हर फोन में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करने की योजना बना रही हैं। इससे यूजर्स की निजी जानकारी और डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे।
UIDAI ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा है कि आधार ऐप का इंस्टॉल होना या न होना, पूरी तरह नागरिकों की इच्छा पर निर्भर है। किसी भी नागरिक को जबरन यह ऐप अपने फोन में डालने की आवश्यकता नहीं है। UIDAI ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचना पर ही विश्वास करें।
साथ ही, आधार कार्ड में संशोधन के मामलों में हो रही देरी को लेकर भी महत्वपूर्ण आदेश जारी हुआ है। केन्द्रीय सूचना आयोग (CIC) ने UIDAI को निर्देश दिया है कि आधार कार्ड सुधार से जुड़े सभी लंबित मामलों के निपटारे के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए। आयोग के अनुसार, इससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी जो अपने आधार डिटेल्स में सुधार के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य आधार को नागरिक सेवाओं से जोड़ना और डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करना है। हालांकि, UIDAI ने साफ किया है कि नागरिकों की निजता और अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बिना उनकी अनुमति के कोई भी ऐप या सेवा अनिवार्य नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधार ऐप को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के पीछे सरकार की मंशा सेवाओं की सुगमता और पारदर्शिता को बढ़ाना है। लेकिन UIDAI ने भरोसा दिलाया है कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक है और लोगों की सहमति के बिना कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
आखिर में, UIDAI ने दोहराया कि आधार से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल और सूचना पर ही भरोसा करें। अफवाहों से बचें और अपने डेटा की सुरक्षा को सर्वोपरि रखें।
