ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद में बड़ा बयान दिया। पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति को सबसे ऊपर रखता है। उन्होंने कहा कि सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पीएम मोदी ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि ईरान-इजराइल युद्ध से पैदा हुए हालात पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की। मोदी ने कहा, “भारत हमेशा से शांति और संवाद का पक्षधर रहा है। हम किसी भी संघर्ष के खिलाफ हैं।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि विदेश मंत्रालय लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और वहां फंसे लोगों की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ी तो सरकार विशेष उड़ानें या अन्य उपाय भी करेगी, ताकि भारतीय सुरक्षित घर लौट सकें।
पीएम मोदी ने यह भी खुलासा किया कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे फोन पर चर्चा की थी। दोनों नेताओं ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समेत पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित बनाए रखने पर रणनीति बनाई। मोदी ने कहा, “भारत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।”
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारत पर आर्थिक असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार लगातार पेट्रोलियम सेक्टर की निगरानी कर रही है, ताकि देश में तेल की आपूर्ति बाधित न हो और आम लोगों पर महंगाई का बोझ न बढ़े।
प्रधानमंत्री ने सदन से अपील की कि देश के सभी राजनीतिक दल इस संकट में एकजुट रहें। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति सदैव संतुलित और राष्ट्रहित में रही है, और आगे भी रहेगी।
अंत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत विश्व शांति, स्थिरता और आपसी संवाद का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी युद्ध की बजाय शांति को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
