इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका भी इस संघर्ष में खुलकर सामने आ गया है, जिससे हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। हाल ही में अमेरिका ने ईरान को 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का अल्टीमेटम दिया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने बात नहीं मानी, तो उसे भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
ईरान ने अमेरिका की धमकी को सख्त शब्दों में खारिज किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे। इसी बीच, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों को निशाना बनाया है। ईरान का दावा है कि इन हमलों से उसकी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
पाकिस्तान के साथ ईरान की वार्ता भी चर्चा में है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह पाकिस्तान में संघर्ष विराम को लेकर वार्ता करने के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि किसी भी बातचीत के प्रस्ताव को ठुकराया नहीं गया है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीद जगी है, लेकिन युद्ध के बादल अभी भी मंडरा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल-ईरान युद्ध की संभावना से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका की भूमिका इस विवाद में निर्णायक हो सकती है, क्योंकि वह लगातार दबाव बना रहा है। वहीं, ईरान अपनी नीतियों पर अडिग है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं कर रहा।
इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं। विभिन्न देशों के नेता शांति की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल समाधान दूर नजर आ रहा है। अगर हालात काबू में नहीं आए, तो यह युद्ध वैश्विक स्तर पर असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में इस संघर्ष को लेकर कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
समाचार एजेंसियों के मुताबिक, इस विवाद की वजह से तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल सकता है। आर्थिक मोर्चे पर भी असर पड़ना तय है। अब सभी की निगाहें अमेरिका, इजरायल और ईरान के अगले कदम पर हैं। जनता और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बातचीत से ही रास्ता निकलेगा और युद्ध की नौबत नहीं आएगी।
