ईरान और इजरायल के बीच तनाव ने नया मोड़ ले लिया है। शनिवार रात तेल अवीव पर ईरान ने अब तक का सबसे भीषण हमला किया, जिससे पूरे शहर में हड़कंप मच गया। महज 40 मिनट के भीतर छह बार सायरन बजाए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
इस युद्ध के चलते पश्चिमी देशों की चिंता भी बढ़ गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अमेरिका को दो टूक शब्दों में कहा कि "यह हमारा युद्ध नहीं है", और ब्रिटेन इस संघर्ष से खुद को दूर रखना चाहता है। इससे साफ है कि पश्चिमी देशों के रुख में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
ईरान ने न सिर्फ इजरायल को निशाना बनाया, बल्कि बहरीन स्थित अमेजन के ऑफिस पर भी हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट, एपल और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों पर भी साइबर अटैक के प्रयास हुए हैं। इससे वैश्विक व्यापार और तकनीकी कंपनियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान के साथ की गई डील में कई खामियां थीं। ट्रम्प ने मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि हालात को संभालना अब पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान-इजरायल युद्ध से मध्य-पूर्व में अस्थिरता और गहरा सकती है। अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देश इस युद्ध के दायरे में आने से बचना चाहते हैं। इन घटनाओं ने वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
फिलहाल, इजरायल ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि उस पर हमला हुआ तो जवाब और भी कठोर होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है, लेकिन हालात कब सामान्य होंगे, इस पर संशय बना हुआ है।
उधर, संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं शांति की कोशिशों में जुटी हैं। लेकिन फिलहाल, युद्ध का खतरा टला नहीं है और क्षेत्र में तनाव चरम पर बना हुआ है।
