प्राइम टुडे न्यूज़ 20 मार्च 2026 कनाडा में इमिग्रेशन फ्रॉड के मामले में दोषी पाए गए गुरप्रीत सिंह ने अब सरकार के खिलाफ ही अदालत में केस दायर कर दिया है। अदालत ने उन्हें दोषी तो माना, लेकिन सजा सुनाने से ठीक पहले जांच प्रक्रिया में खामी सामने आने पर पूरे मामले पर रोक (स्टे) लगा दी गई।Canada Border Services Agency (CBSA) के अनुसार, गुरप्रीत सिंह ने फर्जी जॉब ऑफर लेटर तैयार कर कई लोगों को कनाडा आने या वहां रहने में मदद की। जांच में ऐसे 30 से अधिक आवेदन सामने आए, जो इस फ्रॉड से जुड़े थे। ट्रायल के दौरान जज ने गुरप्रीत सिंह को दोषी करार दिया था, लेकिन सजा से एक दिन पहले जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप से जुड़ा मामला सामने आने पर कोर्ट ने केस को स्टे कर दिया।CBSA के मुताबिक, 34 वर्षीय गुरप्रीत सिंह ने रजिस्टर्ड चैरिटी संस्थाओं का रूप धारण कर फर्जी जॉब ऑफर लेटर तैयार किए और उन्हें मुनाफे के लिए उन लोगों को बेचा, जो कनाडा में प्रवेश पाने या वहां रहने की कोशिश कर रहे थे। ये कथित अपराध 1 जून 2016 से 2 नवंबर 2018 के बीच किए गए।जांच सितंबर 2018 में तब शुरू हुई, जब एक एंट्री पॉइंट पर फर्जी जॉब ऑफर लेटर पकड़ा गया। इसके बाद जांच में कुल 34 इमिग्रेशन आवेदन ऐसे पाए गए, जो इन फर्जी दस्तावेजों से जुड़े थे।जांच में यह भी सामने आया कि गुरप्रीत सिंह करीब 10 साल पहले गुरुद्वारा साहिब के कार्यक्रम में शामिल होने के बहाने अस्थायी वीजा पर कनाडा पहुंचा था। बाद में उसने अवैध रूप से काम करना शुरू किया और लंबे समय तक टैक्स भी नहीं भरा।
CBSA के अनुसार, उसने चैरिटी संस्थाओं के नाम पर फर्जी जॉब लेटर तैयार कर भारी रकम में बेचे। 2018 में एक फर्जी लेटर पकड़े जाने के बाद इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ।ट्रायल के दौरान जेल में रहते हुए गुरप्रीत ने यह आरोप भी लगाया कि उसे मांस खाने के लिए मजबूर किया गया, जो उसके धर्म के खिलाफ है। साथ ही उसने अपने बचाव में दोष एक पुराने रूममेट पर डालने की कोशिश की।दोषी पाए जाने के बावजूद अब सरकार और CBSA पर केस दायर करने को लेकर कनाडा में सोशल मीडिया और मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि इतने सबूत होने के बावजूद सजा पर रोक लगना हैरान करने वाला है। गुरप्रीत सिंह ने केस में मुआवजे के साथ इमिग्रेशन राहत की भी मांग की है।
कनाडा इमिग्रेशन फ्रॉड दोषी करार गुरप्रीत सिंह ने सरकार पर ही ठोका केस, सजा से पहले मामला स्टे
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