अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड का भाव 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे आम जनता की चिंता बढ़ गई है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध जैसे हालात ने तेल बाजार में अस्थिरता को और गहरा कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से तेल की आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
बीते कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 60% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ ही समय पहले तक जहां तेल ₹70 प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था, वहीं अब यह ₹112 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो पेट्रोल-डीजल के दामों में और तेजी आ सकती है।
गोल्डमैन सैश जैसी वित्तीय संस्थाओं ने भी भविष्यवाणी की है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव यूं ही जारी रहा, तो आने वाले महीनों में तेल की कीमतों में और भी उछाल देखने को मिल सकता है। इससे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ने से देश के चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, महंगाई दर में भी इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल हालात सामान्य होने के आसार कम हैं। आम आदमी को आने वाले समय में महंगे पेट्रोल-डीजल और बढ़ती महंगाई के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
तेल बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें अगर इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो परिवहन, खाद्य वस्तुओं समेत कई अन्य सेक्टरों पर भी सीधा असर पड़ेगा। ऐसे में सरकार के सामने महंगाई को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन सकता है।
फिलहाल, निवेशक और उपभोक्ता दोनों की नजर पश्चिम एशिया में बने हालात पर टिकी हुई है। सभी उम्मीद कर रहे हैं कि हालात जल्द सामान्य हों, जिससे तेल की कीमतें फिर से नियंत्रण में आ सकें।
