पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत में बोतलबंद पानी उद्योग को बड़ा झटका दिया है। आपूर्ति बाधित होने के कारण देश में बोतलबंद पानी की कीमतों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। इस स्थिति ने आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक को चिंता में डाल दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान सहित पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से कच्चे तेल के साथ-साथ पानी के आयात और उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। कई कंपनियों ने पहले ही अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसमें बिसलेरी जैसी प्रमुख ब्रांड भी शामिल हैं। बीते कुछ दिनों में बोतलबंद पानी के दाम में 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
बोतलबंद पानी बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की आपूर्ति में बाधा और ट्रांसपोर्टेशन लागत में इजाफा इसके पीछे मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की बोतलें बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत भी बढ़ गई है। परिणामस्वरूप, बोतलबंद पानी का बाजार प्रभावित हो रहा है और ग्राहकों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
देश के कई हिस्सों में गर्मी और जल संकट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बिहार के मखदुमपुर प्रखंड जैसे क्षेत्रों में चापाकल खराब होने के चलते लोगों को पेयजल के लिए पूरी तरह बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसे में दाम बढ़ना आम लोगों के लिए दोहरी परेशानी लेकर आया है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में बोतलबंद पानी की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में जल संकट और गहरा सकता है। सरकार और कंपनियां इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था पर काम कर रही हैं, लेकिन फिलहाल राहत के आसार कम नजर आ रहे हैं।
बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं को परेशान कर दिया है और होटल, रेस्तरां समेत कई व्यवसायों की लागत भी बढ़ गई है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पानी की बर्बादी रोकना और स्थानीय जल स्रोतों का संरक्षण इस संकट से उबरने का सबसे बेहतर उपाय है।
