होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में हाल ही में बड़ा गतिरोध सामने आया है। रूस और चीन ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया, जिससे वैश्विक तनाव और अधिक बढ़ गया है। इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी देशों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
यूएन में पेश किए गए इस प्रस्ताव का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखना था, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रह सके। लेकिन रूस और चीन के वीटो के चलते यह प्रयास विफल हो गया। इससे न केवल समुद्री व्यापार प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर पाकिस्तान ने भी अरब देशों के रुख से अलग हटकर चौंकाने वाला फैसला लिया। पाकिस्तान ने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया, जिससे खाड़ी देशों में नाराजगी देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के इस कदम से क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल का परिवहन होता है। अगर यहां अस्थिरता बढ़ती है, तो वैश्विक तेल बाजार पर भी गहरा असर पड़ सकता है। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं इस मार्ग की सुरक्षा पर निर्भर हैं।
रूस और चीन के वीटो के बाद अब स्थिति और भी जटिल हो गई है। खाड़ी देशों ने इसे अपनी सुरक्षा और हितों के लिए बड़ा झटका बताया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अशांति से विश्व बाजारों में भारी उथल-पुथल मच सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब आगे की रणनीति पर विचार कर रहा है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि खाड़ी देश और अन्य बड़ी ताकतें इस संकट का समाधान कैसे निकालेंगी। फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
