फुजैराह, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का एक प्रमुख बंदरगाह, इन दिनों अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच फुजैराह का महत्व अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। तेल और गैस के वैश्विक व्यापार में इसकी भूमिका अब पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है।
मिडिल ईस्ट का नक्शा हमेशा से ही जटिलताओं से भरा रहा है। UAE के भीतर ओमान की सीमाएँ, और ओमान के भीतर फिर से UAE की जमीन, इस क्षेत्र को और भी रोचक बना देती हैं। लेकिन मौजूदा हालात में फुजैराह बंदरगाह ने दुनिया भर की निगाहें अपनी ओर खींच ली हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य अगर किसी कारणवश बंद हो जाए, तो तेल और गैस के जहाजों के लिए फुजैराह एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में उभरता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फुजैराह से तेल-गैस का निर्यात जारी रह सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट नहीं आएगी। यह बंदरगाह मध्य-पूर्व के तेल भंडार को सुरक्षित रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की क्षमता रखता है।
तेल के बाजार में अनिश्चितता की वजह से निवेशक भी फुजैराह पर नजर बनाए हुए हैं। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में फुजैराह पोर्ट का संचालन और उसकी आपूर्ति श्रृंखला बरकरार रहना, बाजार के लिए राहत की खबर है।
खास बात यह है कि फुजैराह बंदरगाह सीधे ओमान की खाड़ी से जुड़ा है, जो उसे खाड़ी देशों के अन्य बंदरगाहों से अलग बनाता है। यहां से तेल और गैस के जहाज बिना होर्मुज के गुजरते हुए बाहर निकल सकते हैं। यही वजह है कि इस पोर्ट को 'ग्लोबल ऑयल हब' के रूप में भी देखा जा रहा है।
फुजैराह की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक महत्व के कारण यूएई ने इसमें भारी निवेश किया है। यहां विशाल तेल भंडारण टर्मिनल और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं, जो इसे किसी भी आपात स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति का भरोसेमंद केंद्र बनाते हैं।
मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए फुजैराह की अहमियत और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी यह बंदरगाह मिडिल ईस्ट की ऊर्जा रणनीति का केंद्र बना रहेगा।
