अल नीनो साउदर्न ऑसिलेशन (ENSO) का प्रभाव एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में आई एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है, जिसमें ENSO की भूमिका अहम बताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वैश्विक मौसम प्रणाली भारतीय अर्थव्यवस्था और मौसम पर गहरा असर डालती है।
अल नीनो के दौरान पश्चिमी प्रशांत महासागर का खारा पानी गर्म हो जाता है, जिससे मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। Down to Earth- Hindi की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों में अल नीनो की वजह से ठंड और बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल सकता है। इससे किसानों को फसल की पैदावार में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही खाद्य कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
ला नीना ENSO का दूसरा पहलू है, जो भारत में भारी बारिश और कड़ाके की ठंड का कारण बनता है। News18 Hindi के मुताबिक, जब ला नीना सक्रिय होती है, तो मानसून मजबूत होता है और देश के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होती है। हालांकि, इसके चलते अचानक तापमान गिर सकता है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित होता है।
ENSO का सीधा असर भारतीय कृषि, अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अल नीनो के कारण सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है, जबकि ला नीना में बाढ़ जैसी आपदाएं देखने को मिलती हैं। इसी वजह से 2026 में महंगाई बढ़ने के संकेत दिए जा रहे हैं, क्योंकि मौसम की अनिश्चितता से फसल उत्पादन कम हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ENSO पर नजर रखना जरूरी है, ताकि सरकार और किसान समय रहते तैयारी कर सकें। केंद्र सरकार ने भी मौसम के बदलते पैटर्न को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन और कृषि योजनाओं में बदलाव की बात कही है।
अल नीनो और ला नीना की वजह से देश में कभी तेज गर्मी, तो कभी कड़ाके की ठंड देखने को मिलती है। आने वाले सालों में ENSO के प्रभाव को लेकर सतर्कता जरूरी है, ताकि महंगाई और आपदाओं से बचाव किया जा सके। मौसम के इस बदलाव पर सरकार और जनता दोनों को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि इसका असर हर किसी की जिंदगी पर पड़ सकता है।
