Skip to content
Wednesday, March 11, 2026 | LIVE TV
LIVE TV
BREAKING
ईरान युद्ध के असर से खाद्य तेल महंगा सरसों व रिफाइंड 30 रुपये, पॉम ऑयल 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा न्यूक्लियर इमरजेंसी में काम आने वाली दवा ‘प्रशियन ब्लू’ की खाड़ी देशों में बढ़ी मांग, चंडीगढ़ की कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की पूछताछ पंजाब विधानसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ प्रस्ताव पास, किसानों के हितों की रक्षा की उठी जोरदार मांग तकनीकी खामी से हरियाणा में राशन वितरण ठप, 1.59 करोड़ लाभार्थी मार्च के राशन से वंचित मोहाली के सेक्टर-89 में फायरिंग करने वाले 3 शूटर गिरफ्तार, 5 करोड़ की फिरौती मांगने का मामला मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: प्रभजोत कौर स्कूलों में किचन गार्डन से बच्चों को मिल सकता है प्राकृतिक पोषण: विजय दत्त क्राफेड प्रतिनिधिमंडल ने यूटी प्रशासक से की मुलाकात, हाउसिंग बोर्ड की नीड-बेस्ड चेंजेज पॉलिसी पर उठाए अहम मुद्दे चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी फंड में करोड़ों की सेंध, बैंक FDR जांच में सामने आया बड़ा वित्तीय घोटाला सिविल सर्जन ने अभिभावकों से बेटियों का एचपीवी टीकाकरण करवाने की अपील

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु की अनुमति

admin
1 min read
Listen to News
Click play to hear this story
हरीश राणा सुप्रीम कोर्ट
हरीश राणा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद निवासी हरीश राणा के मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है। यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

हरीश राणा 13 वर्षों से जीवन रक्षक मशीनों पर थे और उनका परिवार इस दर्दनाक स्थिति से जूझ रहा था। उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भावुक होकर कहा कि वे इतने सालों से अपने बेटे की पीड़ा नहीं देख पा रहे थे। उन्होंने अदालत का आभार जताते हुए बताया कि यह निर्णय उनके लिए राहत लेकर आया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी मरीज के ठीक होने की कोई संभावना नहीं बचती और वह असहनीय कष्ट झेल रहा होता है, तो उसे सम्मानपूर्वक विदाई का अधिकार मिलना चाहिए। इस फैसले के बाद इच्छामृत्यु पर देशभर में बहस फिर से तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अन्य गंभीर मामलों के लिए भी मिसाल बनेगा।

हरीश राणा के परिवार ने इस दौरान कई मुश्किलें झेली थीं। उनके पिता ने बताया कि वे हर दिन अपने बेटे की तकलीफ देखकर टूट जाते थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने अब उन्हें मानसिक शांति दी है। परिवार ने न्यायपालिका का धन्यवाद करते हुए कहा कि अदालत ने उनकी आवाज सुनी और इंसानियत की मिसाल पेश की।

इच्छामृत्यु के मामले में यह फैसला देश के लिए कई सवाल खड़े करता है। क्या गंभीर रूप से बीमार और कोमा में पड़े मरीजों को इस तरह का अधिकार मिलना चाहिए? समाज में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे मानवीय अधिकार मानते हैं, तो कुछ को इससे नैतिक चिंता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि इस तरह के मामलों में हर पहलू पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। अदालत ने चिकित्सकीय जांच और परिवार की सहमति के बाद ही अंतिम निर्णय देने का निर्देश दिया है। इससे भविष्य में इच्छामृत्यु के मामलों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनी रहेगी।

हरीश राणा का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। उनके परिवार की व्यथा और न्याय की राह में मिली यह जीत कई अन्य परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल कानून, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है।


यह खबर AI-powered ऑटो-ब्लॉगर द्वारा Google Trends के आधार पर तैयार की गई है। विस्तृत जानकारी के लिए मूल स्रोत देखें। — PTN, Prime Today News

Related Stories

Stay Informed. Subscribe Now.

Get breaking news and top stories delivered straight to your inbox. No spam, unsubscribe anytime.