साइबर अपराधी इन दिनों निवेश, पार्ट टाइम नौकरी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग व्हाट्सएप कॉल और ग्रुप के जरिए भरोसा जीतते हैं और फिर खातों में मोटी रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। पुलिस के लिए अब तक इन आरोपियों तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन से स्थिति बदलने की उम्मीद है।नई व्यवस्था के तहत जिस मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप अकाउंट बनाया गया है, वही सिम संबंधित मोबाइल में सक्रिय होना अनिवार्य होगा। यदि सिम सक्रिय नहीं है या फोन में मौजूद नहीं है तो सेवा बंद हो सकती है। इस प्रक्रिया को ‘सिम बाइंडिंग’ कहा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जी सिम और वीपीएन के जरिए संचालित हो रहे अकाउंट्स पर लगाम लगेगी और अपराधियों की पहचान करना आसान होगा।आगरा पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 में साइबर ठगी के 209 मुकदमे दर्ज हुए, जबकि जनवरी-फरवरी में ही 31 मामले सामने आ चुके हैं। अधिकतर मामलों में व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया गया। एडीसीपी क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि अपराधी फर्जी दस्तावेजों से सिम लेते हैं और दूसरे स्थान या देश से व्हाट्सएप चलाते हैं। कई बार वाईफाई और वीपीएन का उपयोग कर लोकेशन छिपाई जाती है, जिससे गिरफ्तारी मुश्किल हो जाती है।
हाल के मामलों में अकोला निवासी बिजेंद्र सिंह से कमीशन का लालच देकर 11 लाख, खंदारी की प्रमोद कुमारी से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 33 लाख और एत्माद्दौला के शैलेंद्र यादव से पार्ट टाइम जॉब के नाम पर 11 लाख रुपये ठगे गए।पुलिस ने होली जैसे त्योहारों पर सतर्क रहने की अपील की है। अनजान लिंक पर क्लिक न करें, एपीके फाइल डाउनलोड न करें और खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताने वालों से सावधान रहें। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
मार्च से ‘सिम बाइंडिंग’ लागू, व्हाट्सएप से होने वाली साइबर ठगी पर लगेगा अंकुश
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