सिक्किम में मंगलवार सुबह अचानक भूकंप के दो तेज झटकों ने लोगों में हड़कंप मचा दिया। करीब 10 सेकंड तक धरती हिलती रही, जिससे लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
भूकंप के झटकों के बाद सिक्किम के कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। लोग सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे की सुरक्षा की जानकारी लेते रहे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जान-माल की हानि की खबर अब तक सामने नहीं आई है।
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सिक्किम सहित देश के कई राज्यों में मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं। इन अभ्यासों के जरिए लोगों को बताया जा रहा है कि भूकंप के दौरान कैसे सुरक्षित रहा जाए। प्रशासन ने अपील की है कि लोग घबराएं नहीं और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
इसी बीच उत्तराखंड के वाडिया इंस्टीट्यूट की एक ताजा स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, रेडॉन गैस का स्तर बढ़ना भूकंप के आने का संकेत दे सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि समय रहते रेडॉन गैस के उत्सर्जन पर नजर रखी जाए तो बड़े भूकंप की संभावना का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
भूकंप की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें बताया गया है कि भूकंप के समय खुले स्थान पर रहें, बिल्डिंग के अंदर हैं तो मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे छुपें, और लिफ्ट का इस्तेमाल न करें। बच्चों और बुजुर्गों की खास देखभाल की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कई राज्य सिस्मिक जोन में आते हैं, जहां कभी भी भूकंप आ सकता है। ऐसे में आम जनता को सजग रहना जरूरी है। प्रशासन ने स्कूलों, दफ्तरों और अस्पतालों में भी आपदा प्रबंधन की मॉक ड्रिल आयोजित करने का आग्रह किया है, ताकि सभी लोग आपात स्थिति में खुद को और दूसरों को सुरक्षित रख सकें।
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। सरकार और प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित रहने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं। आमजन से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
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