मध्य-पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूस ने अपनी भूमिका को लेकर बड़ा संकेत दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे करीबी सहयोगी ने हाल ही में एक अहम बयान देकर हलचल मचा दी है। उनके इस दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान पर इजरायली-अमेरिकी हमले के बाद रूस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुतिन के खासमखास ने दावा किया है कि रूस इस मामले में चुप नहीं बैठ सकता और वह ईरान के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा सकता है। इस बयान के बाद पश्चिमी देशों की चिंता और बढ़ गई है।
रूस ने अपने आधिकारिक बयान में अमेरिका और इजरायल के कदमों की आलोचना की है। मास्को ने साफ कहा है कि ऐसे हमलों से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी और वैश्विक शांति को खतरा होगा। इसके अलावा, रूस ने दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दी है।
दूसरी ओर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी रूस की ओर से बयान सामने आया है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने संकेत दिया है कि यदि ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं तो उनकी नीतियां भी रूस के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में पुतिन की रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह सक्रियता सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका मकसद वैश्विक राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करना भी है। पुतिन के करीबी का यह बयान रूस-ईरान के संबंधों को और प्रगाढ़ बना सकता है, वहीं अमेरिका और इजरायल के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
फिलहाल, रूस के इस कदम के बाद दुनिया भर की निगाहें मास्को की आगे की रणनीति पर टिकी हैं। क्या पुतिन सच में ईरान के समर्थन में खुलकर सामने आएंगे या यह केवल एक कूटनीतिक संदेश है, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिल सकता है।
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