प्राइम टुडे न्यूज़ 11 मार्च 2026 परमाणु हमले या रेडियोलॉजिकल आपदा के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा प्रशियन ब्लू की मांग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती नजर आ रही है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों ने संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रम में बहरीन स्थित एक फार्मा लायजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से संपर्क कर प्रशियन ब्लू कैप्सूल्स के उत्पादन और सप्लाई को लेकर जानकारी मांगी है।एजेंट ने कंपनी से पूछा है कि क्या वह करीब 1 करोड़ कैप्सूल का उत्पादन कर सकती है। साथ ही अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए इसकी डोज, उत्पादन क्षमता और सप्लाई व्यवस्था से जुड़े कई सवाल भी पूछे गए हैं। कंपनी की डायरेक्टर डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार इस विषय पर बातचीत जारी है और एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से इस संबंध में चर्चा कर रहा है। अगर समझौता अंतिम रूप लेता है तो इन दवाओं की सप्लाई बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में की जा सकती है।प्रशियन ब्लू एक ऐसी दवा है जो शरीर में प्रवेश कर चुके रेडियोएक्टिव तत्व सीजियम-137 और थैलियम के प्रभाव को कम करने में मदद करती है। यह कैप्सूल आंतों में इन तत्वों से जुड़कर उन्हें मल के जरिए शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की सूची में शामिल किया है।यह दवा DRDO की दिल्ली स्थित लैब INMAS (इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेज) की तकनीक पर आधारित है। भारत में इसका कमर्शियल उत्पादन लगभग दो साल पहले शुरू हुआ है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है। इससे पहले जून 2025 में इजराइल-ईरान तनाव के दौरान भी इस दवा की मांग सामने आ चुकी है।
न्यूक्लियर इमरजेंसी में काम आने वाली दवा ‘प्रशियन ब्लू’ की खाड़ी देशों में बढ़ी मांग, चंडीगढ़ की कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की पूछताछ
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