ईरान ने हाल ही में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। दोनों देशों की सीमाओं पर ड्रोन गतिविधि और हवाई हमलों के बाद ईरान ने शांति की अपील की है। ईरान ने कहा है कि वह मध्यस्थता के लिए तैयार है और क्षेत्र में स्थिरता कायम रखना चाहता है।
काबुल और कंधार में हुए हवाई हमलों के बाद ईरान ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का सुझाव दिया। ईरान के अधिकारियों ने दोनों देशों से संयम बरतने और युद्ध की स्थिति से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि हिंसा से किसी का भी फायदा नहीं होगा, इसलिए संवाद ही समाधान है।
चीन और रूस के साथ मिलकर ईरान ने तालिबान और पाकिस्तान के नेतृत्व को भी शांति के लिए अपील की है। इन देशों का मानना है कि क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। ईरान ने सीमा पर ड्रोन उड़ाने के मामले को लेकर भी दोनों देशों से चर्चा करने की इच्छा जताई है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी तरह की मध्यस्थता के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका उद्देश्य सिर्फ क्षेत्र में स्थिरता लाना है, न कि किसी पक्ष का समर्थन करना। उन्होंने कहा कि सभी देश आदम के बच्चे हैं और आपसी संघर्ष से बचना चाहिए।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय देशों के बीच एक नई कूटनीतिक पहल शुरू हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की मध्यस्थता से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम हो सकता है। अगर बातचीत सफल होती है, तो इससे पूरे दक्षिण एशिया में शांति का माहौल बन सकता है।
ईरान के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई संस्थाएं उम्मीद कर रही हैं कि ईरान की अपील के बाद दोनों देशों के बीच संवाद शुरू होगा। फिलहाल, सभी की नजरें पाकिस्तान और अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
सारांश के तौर पर, ईरान ने स्पष्ट रूप से युद्ध को रोकने और मध्यस्थता का प्रस्ताव देकर क्षेत्र में शांति की कोशिशें तेज कर दी हैं। आने वाले दिनों में इस पहल का कितना असर होगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
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