पंजाब 10 मार्च 2026 (जगदीश कुमार) पंजाब में भाषा विभाग, पंजाब के निदेशक के मार्गदर्शन में जिला भाषा कार्यालय, एस.ए.एस. नगर द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित ‘हौसलों के रू-ब-रू’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भाषा विभाग पंजाब की विभागीय ध्वनि ‘धनु लेखारी नानका’ से की गई।कार्यक्रम के दौरान शोध अधिकारी डॉ. दर्शन कौर ने सभी उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि महिला केवल समाज का हिस्सा ही नहीं, बल्कि समाज की मजबूत नींव है।प्रसिद्ध कवयित्री सुखविंदर अमृत ने कहा कि महिला की पहचान उस नदी की तरह है जो रास्ते के पत्थरों को तराशकर उन्हें नया रूप देती है। इस अवसर पर उन्होंने नारी मुद्दों पर आधारित अपनी कई रचनाएं जैसे ‘मैं केवल मिट्टी नहीं’, ‘माएं और बेटियां’, ‘नी फूलों जैसी लड़कियों’ और ‘भ्रमण’ श्रोताओं के साथ साझा कीं।सरकारी कॉलेज डेराबस्सी के पूर्व प्रिंसिपल प्रो. गुरदेव पाल ने कहा कि मां की परवरिश ही वह पहला स्कूल होता है जहां बच्चों के विचार और संस्कार बनते हैं। इसलिए माताओं का कर्तव्य है कि वे बेटियों और बेटों दोनों को समान अवसर देकर उनका पालन-पोषण करें, ताकि समाज में समानता और संवेदनशीलता की मजबूत नींव रखी जा सके।
प्रवासी कहानीकार गुरमीत पनाग ने अपने प्रवास के अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रवासी महिला दो संस्कृतियों के बीच अपनी पहचान और स्थान बनाने के लिए लगातार संघर्ष करती है। नए माहौल में रहने के बावजूद वह अपनी जड़ों से जुड़े रहने का प्रयास करती रहती है।इस अवसर पर जगतार सिंह जोग, अमनदीप कौर मोगा और सहजप्रीत कौर ने भी नारी विषयों से संबंधित कविताओं के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए।कार्यक्रम के अंत में डॉ. दर्शन कौर द्वारा आए हुए अतिथियों का सम्मान करते हुए उनका धन्यवाद किया गया। मंच संचालन दिलप्रीत द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया। इस अवसर पर जिला भाषा कार्यालय द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई।इस विचार-चर्चा में करमजीत कौर, गुरचरण सिंह, सरमुख सिंह, बलजीत सिंह, मनजीत सिंह तथा स्टेनोग्राफी के प्रशिक्षु भी उपस्थित रहे।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘हौसलों के रू-ब-रू’ कार्यक्रम का आयोजन
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