होर्मुज जलडमरूमध्य में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर हालात काबू में नहीं आए तो वह जहाजों में आग लगा सकता है। इस धमकी के बाद दुनियाभर में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के दो प्रमुख नौसैनिक ठिकानों—बंदर अब्बास और कोनार्क पोर्ट—पर हमले किए हैं। दोनों बेस को काफी नुकसान पहुंचा है और अब यह संघर्ष युद्ध के चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही विश्व के एक बड़े हिस्से को तेल की आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर सीधे-सीधे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत के लिए भी यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने इस तरह के संकट से निपटने के लिए पहले से ही प्लान-बी तैयार कर रखा है। भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और रणनीतिक तेल भंडारों की व्यवस्था की है, जिससे फिलहाल घरेलू तेल आपूर्ति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए दोनों पक्षों से वार्ता शुरू करने को कहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तनाव और बढ़ा तो इसका असर पूरी वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यहां से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल विश्व बाज़ार में जाता है। ईरान की धमकी और अमेरिका के जवाबी हमले ने हालात को और जटिल बना दिया है।
फिलहाल, भारत सहित कई देश स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ऊर्जा और विदेशी मामलों से जुड़े विभाग सक्रिय रूप से हालात का मूल्यांकन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस तनाव का विश्व अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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