होलिका दहन 2026 को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण पर्व की तिथि और आयोजन को लेकर लोगों में असमंजस है। हजारों लोग इंटरनेट पर होलिका दहन की सही तारीख और मुहूर्त की जानकारी खोज रहे हैं।
पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, ग्रहण के दौरान धार्मिक अनुष्ठान करने से बचना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि होलिका दहन कब किया जाएगा? कई विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रहण समाप्त होने के बाद ही शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करना उचित रहेगा। इससे पर्व की पवित्रता और धार्मिक महत्व बरकरार रहेगा।
ब्रज क्षेत्र के एक प्रसिद्ध गांव में होलिका दहन की परंपरा 5200 साल पुरानी बताई जाती है। यहां पुजारी धधकती आग के बीच से निकलकर पर्व का शुभारंभ करते हैं। यह अनूठी परंपरा आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इससे बुरी शक्तियों का नाश होता है और समाज में सुख-शांति आती है।
होलिका दहन के साथ ही अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है। इस वर्ष होली की तिथि को लेकर भी लोग उत्सुक हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण के कारण होली की तारीख में भी बदलाव संभव है। सही जानकारी के लिए लोग पंडितों से सलाह ले रहे हैं और मुहूर्त पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
पर्व के दौरान सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। प्रशासन द्वारा जगह-जगह आग बुझाने के इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि कोई हादसा न हो। साथ ही लोगों को सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।
होलिका दहन न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर साल लोग उत्साह के साथ इस पर्व को मनाते हैं, लेकिन इस बार ग्रहण के चलते तैयारी में थोड़ी सतर्कता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।
अंत में, पंडितों की सलाह पर ही होलिका दहन की तिथि तय की जाएगी। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों से बचें और केवल प्रमाणिक स्रोतों से ही जानकारी लें। पर्व के शुभ अवसर पर सभी को मिलकर धार्मिक परंपरा का निर्वहन करना चाहिए।
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