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विदेश मंत्रालय की आपत्ति के बाद हरियाणा ने ट्रैवल एजेंट कानून में किया संशोधन, अब एमिग्रेशन एक्ट के अनुरूप होंगे नियम

vishal kumar
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हरियाणा 7 मार्च 2026( प्राइम टुडे न्यूज़ ) हरियाणा विदेश मंत्रालय की आपत्ति के बाद हरियाणा सरकार ने ट्रैवल एजेंटों से जुड़े कानून हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स एक्ट-2025 में संशोधन करने का फैसला किया है। संशोधित विधेयक को राज्य सरकार ने मौजूदा बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को विधानसभा में पेश किया।दरअसल, राज्य सरकार ने पिछले साल अवैध तरीके से विदेश भेजने वाले डंकी रूट पर रोक लगाने के लिए यह सख्त कानून बनाया था। इस कानून में दोषी पाए जाने वाले ट्रैवल एजेंटों के लिए 10 साल तक की सजा और अवैध रूप से अर्जित संपत्ति जब्त करने का प्रावधान किया गया था।हालांकि, विदेश मंत्रालय ने राज्य सरकार को बताया कि इस कानून के कुछ प्रावधान Emigration Act 1983 से मेल नहीं खाते। यह केंद्रीय कानून भारतीय नागरिकों को विदेश में नौकरी के लिए भेजने से जुड़े मामलों को नियंत्रित करता है।मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा राज्य कानून की कुछ धाराओं का गलत फायदा उठाकर ट्रैवल एजेंट एमिग्रेशन एक्ट के नियमों से बच सकते हैं। खास तौर पर उस नियम से, जिसके अनुसार विदेश में नौकरी के लिए लोगों को भेजने वाले एजेंटों का प्रोटेक्टर जनरल ऑफ एमिग्रेंट्स (PGE) के पास पंजीकरण होना अनिवार्य है।इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार कानून की कुछ परिभाषाओं में बदलाव कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य राज्य के कानून को एमिग्रेशन एक्ट 1983 के अनुरूप बनाना और भर्ती एजेंटों पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना है। इस केंद्रीय कानून के तहत बिना पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति या एजेंसी विदेश में नौकरी के लिए लोगों की भर्ती नहीं कर सकती।कानून में ये प्रमुख बदलाव होंगेअभी कानून में प्रवासी की परिभाषा में पढ़ाई, नौकरी या पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले सभी भारतीय शामिल हैं। संशोधन के बाद विदेश में नौकरी के लिए जाने वालों को इस परिभाषा से बाहर रखा जाएगा, क्योंकि यह मामला केंद्रीय कानून के तहत आता है।
ट्रैवल एजेंट की परिभाषा में भी बदलाव किया जाएगा। इसमें विदेश में नौकरी दिलाने या भर्ती से जुड़ी सेवाओं को शामिल नहीं किया जाएगा।सरकार एक नई धारा भी जोड़ रही है, जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि यदि राज्य कानून और किसी केंद्रीय कानून में टकराव होता है, तो केंद्रीय कानून को प्राथमिकता दी जाएगी।

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