कपासन शहर में बुधवार को रासेश्वरी देवी के आगमन पर भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। देवी के स्वागत के लिए रंग-बिरंगी वाहन रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। उनके मंगल प्रवेश के साथ ही तीन दिवसीय प्रवचन कार्यक्रम की शुरुआत हो गई।
आयोजकों के मुताबिक, रासेश्वरी देवी का यह प्रवास धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रवचन के दौरान देवी भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन में सकारात्मकता का संदेश देंगी। इस आयोजन में दूर-दूर से लोग कपासन पहुंचे हैं और माहौल भक्तिमय हो गया है।
राजस्थान के कपासन में देवी का यह प्रवास पहली बार नहीं है। हर वर्ष उनके आगमन पर इसी तरह भव्य आयोजन होते हैं। स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि सभी श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।
दूसरी ओर, देश के अन्य हिस्सों में भी रासेश्वरी देवी और राजराजेश्वरी देवी के मंदिरों में आस्था की झलक देखने को मिलती है। उत्तराखंड के धराली में 400 साल पुराने मां राजराजेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। बीते दिनों आई प्राकृतिक आपदा के बावजूद यहां चमत्कारिक रूप से मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, जिससे भक्तों की आस्था और मजबूत हुई है।
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित राजराजेश्वरी देवी मंदिर भी निशा पूजा के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं।
रासेश्वरी देवी के कपासन आगमन और देशभर में देवी मंदिरों की लोकप्रियता से यह स्पष्ट है कि श्रद्धा और आस्था की जड़ें भारतीय संस्कृति में कितनी गहरी हैं। आगामी तीन दिनों तक कपासन में प्रवचन और भजन संध्या के आयोजन से भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होगी।
इस भव्य आयोजन में भाग लेने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने देवी का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया। कपासन में रासेश्वरी देवी की उपस्थिति से नगर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।
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