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अवार्ड समारोह में कला साधकों का सम्मान, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया रहे मुख्य अतिथि Greater Mohali Area Development Authority ने घटाई परियोजना लागत, हाईकोर्ट सुनवाई और वित्तीय बोलियों के बीच आज अहम दिन मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत मोहाली से 7वीं बस रवाना, विधायक कुलवंत सिंह ने दिखाई हरी झंडी HMT पिंजौर वन में अवैध कटाई का भंडाफोड़, यमुनानगर के 5 आरोपी गिरफ्तार; पिकअप और औजार बरामद
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Greater Mohali Area Development Authority ने घटाई परियोजना लागत, हाईकोर्ट सुनवाई और वित्तीय बोलियों के बीच आज अहम दिन

vishal kumar
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पंजाब 27 फरवरी 2026( प्राइम टुडे न्यूज़ ) पंजाब के मोहाली में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में Greater Mohali Area Development Authority (गमाडा) ने मोहाली नेक्स्ट जेनरेशन रोड्स प्रोग्राम की लागत 783.46 करोड़ रुपये से घटाकर 666.41 करोड़ रुपये कर दी है। यह संशोधन कार्य के दायरे (स्कोप ऑफ वर्क) में बदलाव का हवाला देते हुए किया गया है। संशोधित राशि को लेकर डिविजनल इंजीनियर (C-3), गमाडा की ओर से आधिकारिक कोरिजेंडम जारी किया गया है, जिसमें संशोधित शेड्यूल भी शामिल हैं।हालांकि लागत में कमी और मामले के अदालत में लंबित होने के बावजूद राज्य सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। चंडीगढ़ स्थित वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि तकनीकी बोलियों के मूल्यांकन के बाद 27 फरवरी को वित्तीय बोलियां खोली जाएंगी। संयोग से उसी दिन Punjab and Haryana High Court में इस मामले की पुनः सुनवाई भी निर्धारित है, जिससे यह दिन परियोजना के लिए दोहरी परीक्षा जैसा बन गया है।परियोजना को हाल ही में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। बैठक में 83.4 किलोमीटर प्रमुख सड़कों और चौराहों के उन्नयन, रीसरफेसिंग, सौंदर्यीकरण, संचालन और रखरखाव के लिए 10 वर्ष की रियायत अवधि के तहत हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर कार्य करने के प्रस्ताव, आरएफपी, शेड्यूल और ड्राफ्ट कंसेशन एग्रीमेंट को स्वीकृति दी गई।हालांकि यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ है। इसे मोहाली नगर निगम की जनरल हाउस से अनुमोदन लेना होगा, प्रस्ताव को ‘पार्टी न्यूट्रल’ प्रमाणित किया जाना जरूरी है, तथा पूरी वित्तीय जिम्मेदारी गमाडा और नगर निगम को वहन करनी होगी। राज्य सरकार या वित्त विभाग पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।यह परियोजना शुरुआत से ही विवादों में रही है। जनवरी में खबर सामने आने के बाद इसकी ऊंची लागत और दस वर्षों तक निजी भागीदारी को लेकर सवाल उठे। मामला हाईकोर्ट में चुनौती के रूप में भी पहुंच चुका है, जहां टेंडर प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। अब सबकी नजरें वित्तीय बोलियों और अदालत के फैसले पर टिकी हैं।

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