Skip to content
Friday, February 27, 2026 | LIVE TV
LIVE TV
BREAKING
अवार्ड समारोह में कला साधकों का सम्मान, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया रहे मुख्य अतिथि Greater Mohali Area Development Authority ने घटाई परियोजना लागत, हाईकोर्ट सुनवाई और वित्तीय बोलियों के बीच आज अहम दिन मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत मोहाली से 7वीं बस रवाना, विधायक कुलवंत सिंह ने दिखाई हरी झंडी HMT पिंजौर वन में अवैध कटाई का भंडाफोड़, यमुनानगर के 5 आरोपी गिरफ्तार; पिकअप और औजार बरामद

मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह की जबरन रिटायरमेंट से पंथक राजनीति में भूचाल, एसजीपीसी के फैसले पर उठे सवाल

vishal kumar
1 min read
Listen to News
Click play to hear this story

पंजाब 27 फरवरी 2026( प्राइम टुडे न्यूज़ ) पंजाब अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने गुरुवार को श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी और श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को अनुशासनहीनता और प्रबंधन को चुनौती देने के आरोप में पद से हटाकर जबरन रिटायर कर दिया। लंबे समय से चल रही तनातनी के बीच लिए गए इस फैसले ने पंजाब की पंथक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। फिलहाल उनके स्थान पर नए मुख्य ग्रंथी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह ने मर्यादा के विरुद्ध सार्वजनिक बयानबाजी की और निर्धारित आचरण का पालन नहीं किया। हालांकि पंथक हलकों में इसे महज प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।विवाद की जड़ 2 दिसंबर 2024 को जारी वह हुक्मनामा माना जा रहा है, जिसमें जत्थेदार रहते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल की तत्कालीन नेतृत्व को तनखैया घोषित कर पार्टी के पुनर्गठन के आदेश दिए थे। साथ ही प्रकाश सिंह बादल को दिया गया ‘फख्र-ए-कौम’ खिताब भी वापस ले लिया गया था। इस फैसले को पंथक राजनीति में ऐतिहासिक और विवादास्पद माना गया। इसके बाद उन्होंने एसजीपीसी में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए थे। मार्च 2025 में उन्हें अकाल तख्त के जत्थेदार पद से हटाया गया था।पूर्व हजूरी रागी भाई बलदेव सिंह वडाला और अन्य पंथक संगठनों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे “सच की आवाज दबाने” का प्रयास बताया है। इंटरनेशनल पंथक दल सहित कई नेताओं ने ‘सरबत खालसा’ बुलाने की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि एसजीपीसी पर एक परिवार का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और व्यापक परामर्श की परंपरा कमजोर हुई है।विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पंथक ध्रुवीकरण को तेज कर सकता है। आने वाले समय में इसका असर एसजीपीसी की साख और अकाली दल की सियासी स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

Related Stories

Stay Informed. Subscribe Now.

Get breaking news and top stories delivered straight to your inbox. No spam, unsubscribe anytime.