दुबई दुनिया के सबसे अमीर शहरों में शुमार है, लेकिन यहां आम नागरिकों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता। इसके बावजूद दुबई सरकार का खजाना लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे कई लोग हैरान हैं। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर बिना टैक्स के दुबई इतना धनवान कैसे बन गया।
दुबई की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल, पर्यटन, व्यापार और रियल एस्टेट से आता है। यहां सरकार ने आयकर की जगह पर अन्य शुल्क और टैक्स लगाए हैं, जैसे कि वैट, एक्साइज ड्यूटी और विभिन्न लाइसेंस फीस। विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक माहौल और खुले व्यापार के कारण भी सरकार की आमदनी बढ़ती है।
दुबई के कारोबार में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं, जिनसे सरकार को भारी राजस्व मिलता है। इसके अलावा, हर साल लाखों पर्यटक यहां घूमने आते हैं, जिससे होटल, शॉपिंग और अन्य सेवाओं के माध्यम से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। यही वजह है कि यहां के नागरिकों को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता, फिर भी सरकार के पास पर्याप्त पैसा होता है।
दुबई में भारतीयों की भी बड़ी संख्या है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश के जलालाबाद कस्बे को 'मिनी दुबई' कहा जाता है, क्योंकि वहां से पांच हजार से अधिक लोग दुबई में काम करते हैं। जलालाबाद के लगभग हर घर से एक या दो लोग दुबई में नौकरी या व्यापार करते हैं, जिससे दोनों जगहों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है।
हाल ही में दुबई पुलिस ने एक करोड़पति भिखारी को गिरफ्तार किया, जिसने दिन में भीख मांगी और रात को लग्जरी कार में घूमता था। इस घटना ने वहां की सामाजिक व्यवस्था और पुलिस की सतर्कता को उजागर किया है। दुबई में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां लोग फर्जी तरीके से भीख मांगकर पैसे कमाते हैं।
दुबई की आर्थिक नीति, निवेश के मौके और कानून व्यवस्था ने इसे विश्व स्तर पर एक मजबूत शहर बना दिया है। यहां की सरकार पारदर्शी और कुशल प्रबंधन के लिए जानी जाती है, जिससे आम नागरिकों को टैक्स का बोझ नहीं झेलना पड़ता। यही कारण है कि दुबई हर साल और अमीर होता जा रहा है।
यह खबर AI-powered ऑटो-ब्लॉगर द्वारा Google Trends के आधार पर तैयार की गई है। विस्तृत जानकारी के लिए मूल स्रोत देखें। — PTN, Prime Today News
