चंडीगढ़ 12 मार्च 2026 ( प्राइम टुडे न्यूज़) Chandigarh प्रशासन और नगर निगम में लंबे समय से एक ही संवेदनशील पदों पर तैनात अधिकारियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब चंडीगढ़ से सांसद Manish Tewari ने संसद में इस संबंध में सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उनके सवाल के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।सांसद ने संसद में पूछा है कि चंडीगढ़ प्रशासन में ऐसे कितने अधिकारी हैं जो तीन साल से अधिक समय से एक ही संवेदनशील पद पर तैनात हैं और वे किन-किन विभागों में कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि केंद्रीय नियमों के बावजूद इन अधिकारियों का समय पर तबादला क्यों नहीं किया गया।
दरअसल Central Vigilance Commission (CVC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार की संभावना को कम करने के लिए संवेदनशील पदों पर तैनात अधिकारियों का हर तीन साल में रोटेशन या तबादला किया जाना जरूरी होता है।सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन के सतर्कता विभाग ने वर्ष 2025 में कई बार अलग-अलग विभागों को पत्र लिखकर ऐसे अधिकारियों की जानकारी मांगी थी। बताया जा रहा है कि 18 जून, 21 नवंबर और 11 दिसंबर को इस संबंध में पत्र भेजे गए, लेकिन कई विभागों और नगर निगम से समय पर निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके कारण रिपोर्ट समय पर CVC को नहीं भेजी जा सकी।अब जब यह मामला संसद तक पहुंच गया है, तो माना जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम और अन्य बोर्डों में बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले किए जा सकते हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रिपोर्ट में नियमों की अनदेखी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है। वहीं संसद में उठे इस मुद्दे के बाद प्रशासन पर पारदर्शिता बनाए रखने और नियमों का सख्ती से पालन करने का दबाव बढ़ गया है।
चंडीगढ़ प्रशासन में ‘संवेदनशील’ पदों पर लंबे समय से जमे अधिकारी, संसद में उठा मुद्दा
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