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चंडीगढ़ में शेयर-वाइज प्रॉपर्टी बिक्री पर एसओपी पर उठे सवाल, सेक्टर-9 में 79% हिस्से के ट्रांसफर से बढ़ा विवाद

vishal kumar
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चंडीगढ़, 26 फरवरी (जगदीश कुमार) चंडीगढ़ में शेयर-वाइज प्रॉपर्टी बिक्री पर लगी रोक को लेकर प्रशासन द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की प्रभावशीलता पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। 26 फरवरी को सेक्टर-9 स्थित कोठी नंबर 341 (4 कनाल) के 79.08 प्रतिशत हिस्से का ट्रांसफर एस्टेट ऑफिस में किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद नियमों के समान अनुपालन को लेकर विवाद गहरा गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार 26/2 को उक्त हिस्से का ट्रांसफर किया गया और खरीदार को भौतिक कब्जा भी सौंप दिया गया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई बैंक के अनुरोध पर की गई और नीलामी बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेशों के तहत संपन्न हुई थी। हालांकि आलोचकों का आरोप है कि यह ट्रांसफर प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के विपरीत है। संबंधित संगठन का दावा है कि मौजूदा एसओपी पहले दिन से ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप नहीं है।चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस में चंडीगढ़ प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम चोपड़ा और अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि बिना रक्त संबंध (ब्लड रिलेशन क्लॉज) के किसी संपत्ति का शेयर ट्रांसफर संभव है, तो अन्य मामलों में इसी प्रकार के ट्रांसफर पर रोक क्यों लगाई जा रही है। उन्होंने चयनात्मक ट्रांसफर की नीति पर भी आपत्ति जताई।एसोसिएशन ने दावा किया कि शेयर-वाइज रजिस्ट्रियों पर रोक के कारण सरकार को लगभग 600 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि शहर में शेयर-वाइज रजिस्ट्रियों को तुरंत प्रभाव से दोबारा शुरू किया जाए ताकि बाजार में स्पष्टता और पारदर्शिता बनी रहे।फिलहाल इस पूरे मामले पर चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे प्रॉपर्टी बाजार से जुड़े लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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