2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को पड़ने जा रहा है, जिसे लेकर ज्योतिषियों में खासा उत्साह है। इस खगोलीय घटना का प्रभाव भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा। ग्रहण से जुड़ी मान्यताओं के कारण लोग इसकी तिथि, सूतक काल और राशियों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर उत्सुक हैं।
ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण कई राशियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा। मेष, सिंह, तुला, धनु और मकर राशि के जातकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ग्रहण के दौरान मानसिक तनाव, निर्णय में असमंजस और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले आरंभ होता है। इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन और महत्वपूर्ण कार्यों से बचना शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और वृद्धों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
ग्रहण के समय कुछ उपाय अपनाने से नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं। तुलसी के पत्ते भोजन में डालना, मंत्र जाप करना और दान देना शुभ रहता है। ग्रहण के बाद स्नान कर घर की सफाई और भगवान का ध्यान करना भी लाभकारी माना गया है।
कई लोग इस समय के दौरान ध्यान और साधना करते हैं, जिससे मानसिक शांति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में कोई भी नया कार्य या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। पुरानी परंपराओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, 2026 का यह चंद्र ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। खगोल प्रेमियों के लिए यह एक अद्भुत दृश्य होगा, वहीं धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसकी अहमियत कम नहीं है। इस दिन लाखों लोग ग्रहण के प्रभाव से बचाव के लिए विशेष पूजा-पाठ करेंगे।
अंत में, ध्यान रखें कि चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, जिसका ज्योतिष और धार्मिक जीवन में गहरा असर पड़ता है। सावधानी बरतें, सही जानकारी रखें और वैज्ञानिक तथ्यों को भी समझें।
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